आदि पर्व  अध्याय १४

सूत उवाच

पुरा देवय़ुगे व्रह्मन्प्रजापतिसुते शुभे |  ५   क
आस्तां भगिन्यौ रूपेण समुपेतेऽद्भुतेऽनघे ||  ५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति