कर्ण पर्व  अध्याय ५१

सञ्जय़ उवाच

स चेदिकाशिपाञ्चालान्करूषान्मत्स्यकेकय़ान् |  २७   क
शरैः प्रच्छाद्य निधनमनय़त्परुषास्त्रवित् ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति