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शान्ति पर्व
अध्याय १४
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वैशम्पाय़न उवाच
मित्रता सर्वभूतेषु दानमध्ययनं तपः |  १५   क
व्राह्मणस्यैष धर्मः स्यान्न राज्ञो राजसत्तम ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति