अनुशासन पर्व  अध्याय १४

उपमन्युरु उवाच

नीलकण्ठं महात्मानमसक्तं तेजसां निधिम् |  ११६   क
अष्टादशभुजं स्थाणुं सर्वाभरणभूषितम् ||  ११६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति