अनुशासन पर्व  अध्याय १४

उपमन्युरु उवाच

अद्वितीय़मनिर्देश्यं सर्वभूतभय़ावहम् |  १२५   क
सस्फुलिङ्गं महाकाय़ं विसृजन्तमिवानलम् ||  १२५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति