अनुशासन पर्व  अध्याय १४

उपमन्युरु उवाच

येन तत्त्रिपुरं दग्ध्वा क्षणाद्भस्मीकृतं पुरा |  १२८   क
शरेणैकेन गोविन्द महादेवेन लीलय़ा ||  १२८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति