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अनुशासन पर्व
अध्याय १४
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उपमन्युरु उवाच
गुह्यमस्त्रं परं चापि तत्तुल्याधिकमेव वा |  १३१   क
यत्तच्छूलमिति ख्यातं सर्वलोकेषु शूलिनः ||  १३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति