अनुशासन पर्व  अध्याय १४

उपमन्युरु उवाच

तेऽभिवाद्य महात्मानं परिवार्य समन्ततः |  १४६   क
अस्तुवन्विविधैः स्तोत्रैर्महादेवं सुरास्तदा ||  १४६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति