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अनुशासन पर्व
अध्याय १४
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उपमन्युरु उवाच
व्रह्मा नाराय़णश्चैव देवराजश्च कौशिकः |  १४८   क
अशोभन्त महात्मानस्त्रय़स्त्रय़ इवाग्नय़ः ||  १४८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति