menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
chevron_left
chevron_right
वासुदेव उवाच
न हि तेऽप्राप्यमस्तीह त्रिषु लोकेषु किञ्चन |  १५   क
लोकान्सृजेस्त्वमपरानिच्छन्यदुकुलोद्वह ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति