अनुशासन पर्व  अध्याय १४

उपमन्युरु उवाच

नमस्ते भगवन्देव नमस्ते भक्तवत्सल |  १६३   क
योगेश्वर नमस्तेऽस्तु नमस्ते विश्वसम्भव ||  १६३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति