अनुशासन पर्व  अध्याय १४

उपमन्युरु उवाच

एवमुक्तस्य चैवाथ महादेवेन मे विभो |  १७७   क
हर्षादश्रूण्यवर्तन्त लोमहर्षश्च जाय़ते ||  १७७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति