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अनुशासन पर्व
अध्याय १४
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उपमन्युरु उवाच
तत्र ते भविता कामं सांनिध्यं पय़सो निधेः |  १९३   क
क्षीरोदनं च भुङ्क्ष्व त्वममृतेन समन्वितम् ||  १९३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति