शान्ति पर्व  अध्याय २१८

शक्र उवाच

भूतानामिह वै यस्त्वा मय़ा विनिहितां सतीम् |  २९   क
उपहन्यात्स मे द्विष्यात्तथा शृण्वन्तु मे वचः ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति