अनुशासन पर्व  अध्याय १४

उपमन्युरु उवाच

पश्य वृक्षान्मनोरम्यान्सदा पुष्पफलान्वितान् |  १९९   क
सर्वर्तुकुसुमैर्युक्तान्स्निग्धपत्रान्सुशाखिनः |  १९९   ख
सर्वमेतन्महावाहो दिव्यभावसमन्वितम् ||  १९९   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति