अनुशासन पर्व  अध्याय १४

वासुदेव उवाच

नानाशकुनिसम्भोज्यैः फलैर्वृक्षैरलङ्कृतम् |  ३२   क
यथास्थानविनिक्षिप्तैर्भूषितं वनराजिभिः ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति