अनुशासन पर्व  अध्याय १४

वासुदेव उवाच

रुरुवारणशार्दूलसिंहद्वीपिसमाकुलम् |  ३३   क
कुरङ्गवर्हिणाकीर्णं मार्जारभुजगावृतम् |  ३३   ख
पूगैश्च मृगजातीनां महिषर्क्षनिषेवितम् ||  ३३   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति