अनुशासन पर्व  अध्याय १४

वासुदेव उवाच

सुदुःखान्निय़मांस्तांस्तान्वहतः सुतपोन्वितान् |  ४०   क
पश्यन्नुत्फुल्लनय़नः प्रवेष्टुमुपचक्रमे ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति