अनुशासन पर्व  अध्याय १४

वासुदेव उवाच

ततो मां भगवानाह साम्ना परमवल्गुना |  ४८   क
लप्स्यसे तनय़ं कृष्ण आत्मतुल्यमसंशय़म् ||  ४८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति