menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
chevron_left
chevron_right
वासुदेव उवाच
तेजसां तपसां चैव निधिः स भगवानिह |  ५१   क
शुभाशुभान्वितान्भावान्विसृजन्सङ्क्षिपन्नपि |  ५१   ख
आस्ते देव्या सहाचिन्त्यो यं प्रार्थय़सि शत्रुहन् ||  ५१   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति