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अनुशासन पर्व
अध्याय ५८
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भीष्म उवाच
यदि नो व्राह्मणास्तात सन्त्यजेय़ुरपूजिताः |  ३०   क
पश्यन्तो दारुणं कर्म सततं क्षत्रिय़े स्थितम् ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति