अनुशासन पर्व  अध्याय १४

वासुदेव उवाच

ततो मामव्रवीन्माता दुःखशोकसमन्विता |  ८१   क
पुत्रस्नेहात्परिष्वज्य मूर्ध्नि चाघ्राय़ माधव ||  ८१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति