अनुशासन पर्व  अध्याय १४

वासुदेव उवाच

समास्थितश्च भगवान्दीप्यमानः स्वतेजसा |  ९०   क
आजगाम किरीटी तु हारकेय़ूरभूषितः ||  ९०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति