आश्वमेधिक पर्व  अध्याय १४

वैशम्पाय़न उवाच

तथा भगवता चित्रं कल्याणं वहु भाषितम् |  १०   क
देवर्षिणा नारदेन देवस्थानेन चैव ह ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति