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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १४
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धृतराष्ट्र उवाच
व्रह्मेव भगवानेष सर्वभूतजगत्पतिः |  १२   क
युधिष्ठिरो महातेजा भवतः पालय़िष्यति ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति