सभा पर्व  अध्याय ३५

भीष्म उवाच

नास्मा अनुनय़ो देय़ो नाय़मर्हति सान्त्वनम् |  ६   क
लोकवृद्धतमे कृष्णे योऽर्हणां नानुमन्यते ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति