वन पर्व  अध्याय १४

वासुदेव उवाच

स्त्रिय़ोऽक्षा मृगय़ा पानमेतत्कामसमुत्थितम् |  ७   क
व्यसनं चतुष्टय़ं प्रोक्तं यै राजन्भ्रश्यते श्रिय़ः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति