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विराट पर्व
अध्याय १४
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द्रौपद्यु उवाच
यथाहमन्यं पाण्डुभ्यो नाभिजानामि कञ्चन |  १८   क
तेन सत्येन मां प्राप्तां कीचको मा वशे कृथाः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति