भीष्म पर्व  अध्याय १४

वैशम्पाय़न उवाच

जामदग्न्यं रणे राममाय़ोध्य वसुसम्भवः |  ७   क
न हतो जामदग्न्येन स हतोऽद्य शिखण्डिना ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति