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द्रोण पर्व
अध्याय १४
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सञ्जय़ उवाच
गदय़ा मद्रराजेन सव्यदक्षिणमाहतः |  २५   क
नाकम्पत तदा भीमो भिद्यमान इवाचलः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति