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भीष्म पर्व
अध्याय २४
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श्रीभगवानु उवाच
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय़; नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि |  २२   क
तथा शरीराणि विहाय़ जीर्णा; न्यन्यानि संय़ाति नवानि देही ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति