menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
उद्योग पर्व
अध्याय १४७
chevron_left
chevron_right
वासुदेव उवाच
एवं वदान्यो धर्मज्ञः सत्यसन्धश्च सोऽभवत् |  २४   क
प्रिय़ः प्रजानामपि संस्त्वग्दोषेण प्रदूषितः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति