कर्ण पर्व  अध्याय १४

सञ्जय़ उवाच

सजीवांश्च नरान्पश्य कूजमानान्समन्ततः |  ५१   क
उपास्यमानान्वहुभिर्न्यस्तशस्त्रैर्विशां पते ||  ५१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति