उद्योग पर्व  अध्याय ३६

हंस उवाच

उत्तमानेव सेवेत प्राप्ते काले तु मध्यमान् |  २०   क
अधमांस्तु न सेवेत य इच्छेच्छ्रेय़ आत्मनः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति