शान्ति पर्व  अध्याय १४०

भीष्म उवाच

तस्मात्तीक्ष्णः प्रजा राजा स्वधर्मे स्थापय़ेदुत |  २७   क
अन्योन्यं भक्षय़न्तो हि प्रचरेय़ुर्वृका इव ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति