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शान्ति पर्व
अध्याय १४०
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भीष्म उवाच
वुद्धिसञ्जननं राज्ञां धर्ममाचरतां सदा |  ५   क
जय़ो भवति कौरव्य तदा तद्विद्धि मे वचः ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति