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द्रोण पर्व
अध्याय १४०
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सञ्जय़ उवाच
वर्तमाने तथा रौद्रे रात्रिय़ुद्धे विशां पते |  १   क
सर्वभूतक्षय़करे धर्मपुत्रो युधिष्ठिरः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति