आदि पर्व  अध्याय १७८

वैशम्पाय़न उवाच

दृष्ट्वा हि तान्मत्तगजेन्द्ररूपा; न्पञ्चाभिपद्मानिव वारणेन्द्रान् |  ९   क
भस्मावृताङ्गानिव हव्यवाहा; न्पार्थान्प्रदध्यौ स यदुप्रवीरः ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति