द्रोण पर्व  अध्याय १३१

सञ्जय़ उवाच

निहताय़ां तु माय़ाय़ाममर्षी स घटोत्कचः |  ३७   क
विससर्ज शरान्घोरांस्तेऽश्वत्थामानमाविशन् ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति