कर्ण पर्व  अध्याय १

वैशम्पाय़न उवाच

सुहृदस्त्वद्धिते युक्तान्भीष्मद्रोणमुखान्परैः |  ३२   क
निहतान्युधि संस्मृत्य कच्चिन्न कुरुषे व्यथाम् ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति