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आदि पर्व
अध्याय १४१
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वैशम्पाय़न उवाच
त्वन्निय़ोगेन चैवेय़ं रूपं मम समीक्ष्य च |  ५   क
कामय़त्यद्य मां भीरुर्नैषा दूषय़ते कुलम् ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति