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अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
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भीष्म उवाच
विश्वेश्वरमजं देवं जगतः प्रभवाप्ययम् |  १४२   क
भजन्ति ये पुष्कराक्षं न ते यान्ति पराभवम् ||  १४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति