अनुशासन पर्व  अध्याय १४१

भीष्म उवाच

अद्वितीय़ेन मुनिना जपता चर्मवाससा |  १३   क
फलभक्षेण राजर्षे पश्य कर्मात्रिणा कृतम् ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति