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कर्ण पर्व
अध्याय ४
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सञ्जय़ उवाच
वसातय़ो महाराज द्विसाहस्राः प्रहारिणः |  ३६   क
शूरसेनाश्च विक्रान्ताः सर्वे युधि निपातिताः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति