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द्रोण पर्व
अध्याय १२९
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सञ्जय़ उवाच
गजानां गर्जितैश्चापि तुरङ्गाणां च हेषितैः |  १७   क
खुरशव्दनिपातैश्च तुमुलः सर्वतोऽभवत् ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति