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द्रोण पर्व
अध्याय १४१
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सञ्जय़ उवाच
अप्राप्तामेव तां शक्तिं त्रिधा चिच्छेद कौरवः |  ५२   क
पश्यतः सर्वलोकस्य भीमस्य च महात्मनः ||  ५२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति