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द्रोण पर्व
अध्याय १४१
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सञ्जय़ उवाच
पुत्रस्तु तव राजेन्द्र रथाद्धेमपरिष्कृतात् |  ५५   क
आप्लुतः सहसा यानं नन्दकस्य महात्मनः ||  ५५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति