आदि पर्व  अध्याय १४२

वैशम्पाय़न उवाच

स मार्यमाणो भीमेन ननाद विपुलं स्वनम् |  २९   क
पूरय़ंस्तद्वनं सर्वं जलार्द्र इव दुन्दुभिः ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति