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शान्ति पर्व
अध्याय १४२
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भीष्म उवाच
तस्य काल्यं गता भार्या चरितुं नाभ्यवर्तत |  २   क
प्राप्तां च रजनीं दृष्ट्वा स पक्षी पर्यतप्यत ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति