अनुशासन पर्व  अध्याय १४२

व्रह्मो उवाच

उपेत्य शकटैर्यान्ति न सेवन्ति रजस्वलाम् |  १२   क
अभुक्तवत्सु नाश्नन्ति दिवा चैव न शेरते ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति